पहले 24 घंटे
- 20 मिनट: दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य की ओर लौटने लगते हैं।
- 8 से 12 घंटे: खून में कार्बन मोनोऑक्साइड तेज़ी से घटता है और ऑक्सीजन का स्तर संभल जाता है।
- 24 घंटे: फालतू CO निकल चुका होता है, और आपके दिल पर पहले से कम दबाव है।
दूसरा और तीसरा दिन: स्वाद, गंध और साँस
करीब 48 घंटे पर नसों के सिरे फिर उगने लगते हैं और स्वाद व गंध साफ़ होने लगते हैं; ज़्यादातर लोग इसे सबसे पहले खाने में महसूस करते हैं। 72 घंटे तक साँस की नलियां ढीली पड़ती हैं और साँस लेना आसान लगता है। यही लक्षणों का चरम भी है, यानी अच्छी खबर और मुश्किल दिन साथ-साथ चलते हैं। दोनों गुज़र जाते हैं।
दूसरे से 12वें हफ़्ते: इंजन की मरम्मत
खून का दौरा और फेफड़ों की क्षमता मापने लायक सुधरती है। चलना, सीढ़ियां और कसरत आसान होने लगते हैं। आने वाले महीनों में साँस की नलियों को साफ़ करने वाले महीन रोएं (सिलिया) फिर उग आते हैं, इसलिए खांसी और साँस फूलना घटता रहता है; 9 महीनों में फेफड़ों की क्षमता करीब 10 प्रतिशत तक सुधर सकती है।
एक साल और उसके आगे
एक साल बिना सिगरेट के रहने पर कोरोनरी हृदय रोग का अतिरिक्त जोखिम सिगरेट पीते रहने वाले का करीब आधा रह जाता है। आगे चलते रहें तो फासला और घटता है: स्ट्रोक का जोखिम करीब 5 साल में सिगरेट न पीने वाले के पास पहुँच जाता है, और 10 से 15 साल बाद फेफड़ों के कैंसर और दिल की बीमारी का जोखिम सिगरेट पीने वाले के जोखिम का एक छोटा हिस्सा रह जाता है।
पैसे की टाइमलाइन और भी तेज़ है
सेहत के फायदे चुपचाप जुड़ते हैं; बचत आंखों के सामने जुड़ती है। रोज़ का एक पैकेट पीने की आदत आम दामों पर साल में हज़ारों रुपये खा जाती है। जो भी सिगरेट आप छोड़ते हैं, उसका पैसा आपकी जेब में रहता है। इसीलिए बचत का आँकड़ा बढ़ते देखना छोड़ने के सफर के सबसे हौसला देने वाले आँकड़ों में से है।
धीरे-धीरे कम करने वाले प्लान में ये पड़ाव आख़िरी सिगरेट का इंतज़ार नहीं करते: हर कदम नीचे का मतलब है कम कार्बन मोनोऑक्साइड, बिना सिगरेट के लंबे अंतराल और ज़्यादा बचे पैसे, आज से ही। पूरे फायदे शून्य पर मिलते हैं; शून्य ही क्यों मंज़िल होनी चाहिए, इसके लिए देखें दिन में कितनी सिगरेट सुरक्षित है।